July 5, 2022

भारत के लगभग सभी राज्यों में जमीन विवाद एक बहुत ही बड़ा समस्या है, सभी राज्यों के कोर्ट में जमीन विवाद के मामले सबसे अधिक पाए जाते हैं, क्योंकि जमीन एक ही और उसे फर्जी तरीके से अलग-अलग लोगों से खरीद बिक्री कर की जाती है। इस समस्या को खत्म करने के लिए भूमि सुधार ने इस बार के बजट में एक बहुत ही बेहतरीन कार्य किया है।

 

जमीन के फौजी बहना में तथा किसी भी प्रकार के विवाद से निपटने के लिए सरकार ने वन नेशन वन रजिस्ट्रेशन की नई सुविधा पूरे देश भर में लागू करने का ऐलान किया है। इस काम के लिए सभी राज्य भी अपनी सहमति दे चुके हैं। तब इसके लिए एक खास सॉफ्टवेयर बनाया जा रहा है जिसे नेशनल जेनेरिक डॉक्युमेंट रजिस्ट्रेशन सिस्टम से जोड़ा जाएगा।

 

राज्यों की बात की जाए तो अपने देश के अधिकांश राज्यों में जमीन के दस्तावेज ऑनलाइन किए जा रहे हैं, इसका सीधा फायदा केंद्र सरकार द्वारा रूट शुरू हो रहे इस नए वन नेशन वन रजिस्ट्रेशन पर पड़ेगा, अब चुकी जमीन के दस्तावेज का कंप्यूटरीकरण हो जाने के बाद इसे सूचना एवं प्रौद्योगिकी से लिंक कर दिया जाएगा।

 

सभी राज्यों में अलग-अलग चरणों में जमीन का सर्वेक्षण करके दस्तावेजों का डिजिटल फॉर्मेट में कंप्यूटरीकरण किया जा रहा है, नई व्यवस्था के तहत हर छोटे से बड़े जमीन को एक यूनिक लैंड पार्सल आईडेंटिफिकेशन नंबर से लैस किया जाएगा। अब ऐसे में जमीन की रजिस्ट्री होने से पहले जमीन के मालिकाना हक की जानकारी तुरंत मिल मिल सकेगी जिससे फर्जीवाड़े होने की आशंका पूरी तरह से खत्म हो जाएगी।

 

सभी राज्यों के लोगों को इस नई व्यवस्था का फायदा यह भी होगा कि जनता आठवीं अनुसूची में दर्ज सभी भाषाओं में जमीन के नकल के दस्तावेज ऑनलाइन प्राप्त कर सकते हैं तथा इसके लिए और इंतजार करना नहीं होगा एक चालान भर के रिकॉर्ड रूम में जाने पर कर्मचारी कंप्यूटर से नकल का कॉपी निकाल कर तुरंत देने में सक्षम हो सकेंगे।

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