Saturday, September 19

भागलपुर में खुदाई में मिला 3200 वर्ष पुराना टेराकोट का हाथी और भी बहुत कुछ देखे तस्वीरें

भागलपुर में 3200 वर्ष पूर्व (1200 ईसा पूर्व) उन्नत खेती होती थी। बिहपुर के जयरामपुर के गवारीडीह स्थित टिल्हे के तलहटी से मिले अवशेषों से इसका प्रमाण मिलता है। टेराकोट का हाथी भी मिला है। गवारीडीह उस समय उन्नत गांव था जिसमें नगरी सभ्यता की झलक दिखनी शुरू हो गयी थी। पुराविदों के द्वारा यह अनुमान लगाया जा रहा है कि उस समय की सभ्यता कृषि और पशुपालन पर आधारित थी।

पीजी प्राचीन भारत इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बिहारी लाल चौधरी ने कहा कि चंपानगरी की पृष्ठभूमि गवारीडीह ही रही होगी। खेती-बाड़ी उन्नत होने की वजह से ही उस समय लोगों ने नगर की परिकल्पना की होगी। क्योंकि चंपानगरी 600 ईसा पूर्व की है। जबकि गवारीडीह स्थित टिल्हे से जो प्रमाण मिले हैं वह 1200 ईसा पूर्व के हैं।

बर्तन का टुकड़ा (मृदभांड) ताम्र, मोहर और पत्थर के बाट के टुकड़ों से यह यह प्रमाण मिल रहा है कि गांव में धनाढ्य लोग काफी थे। विभाग के प्राध्यापक डॉ. पवन शेखर और डॉ. दिनेश कुमार गुप्ता ने कहा कि कटाव के दौरान गांव के लोगों को जो भी पुरातत्विक अवशेष मिले हैं, उसमें बरसिंघा और हिरण के भी जीवाश्म हैं। इसके अलावे कई और मवेशी के जीवाश्म भी मिले हैं।

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