Tuesday, April 13

Motivation

IAS काजल – डॉक्टर से बनी शादी के बाद आईएएस टॉपर इन हस्तियों ने की थी सहायता और एसी थी स्ट्रेटजी
Motivation

IAS काजल – डॉक्टर से बनी शादी के बाद आईएएस टॉपर इन हस्तियों ने की थी सहायता और एसी थी स्ट्रेटजी

हरियाणा में रहने वाली काजल बचपन से ही डॉक्टर बनने के ख्वाब देखती लेकिन काजल ज्वाला के तकदीर में जनता की सेवा लिखी थी उनके पिता के द्बारा कहा गया केवल एक लफ्ज़ काजल के दिमाग में बैठ गया पिता ने कहा था बेटा " तुममे काबिलियत है आईएएस बनने की और तुम बन सकती हो " इस बात से प्रेरित होकर काजल ने कुछ ऐसा कर दिखाया के पिता की आंखें नम हो गई काजल अपने पिता की बात से प्रेरित होकर विप्रो जैसी बड़ी कंपनी में नौकरी करने के साथ यूपीएससी की तैयारी में जुनून और लगन के साथ जुटी रही चूकि घर की आर्थिक स्थिति ठीक ना थी इसलिए इन्होंने नौकरी नहीं छोड़ी।     शादी के बाद यूपीएससी टॉपर   जॉब के दौरान इनकी 2016 में ही शादी हो गई। परंतु काजल ने अपनी सक्सेस और तैयारी के बीच नहीं आने दिया। समाज की सोच लड़कियों के लिए यही है कि शादी के बाद सक्सेज़ हासिल करना बहुत बड़ी बात है या शादी के ...
पुरषों को बदलनी होगी सोच, हर क्षेत्र के साथ महिलाएं इस क्षेत्र में भी दे रही हैं पुरषों को टक्कर
Motivation

पुरषों को बदलनी होगी सोच, हर क्षेत्र के साथ महिलाएं इस क्षेत्र में भी दे रही हैं पुरषों को टक्कर

  हर क्षेत्र में तो महिलाएं पुरुषों को टक्कर दे ही रहे थी परंतु इस बार सबसे कठिन और पारिश्रमिक कार्य में भी अब महिलाओं ने पुरुषों को टक्कर देना प्रारंभ कर दिया है।  अब पुरुषों को अपनी सोच बदलनी पड़ेगी की महिलाएं सिर्फ घर के लिए ही बनी है। वर्तमान समय में महिलाएं अब घर में बैठना नहीं चाहती हैं। वह खाली समय में आय का जरिया बनाना पसंद करती हैं कुछ महिलाएं सर्विस कर के और जो महिलाएं ग्रामीण इलाकों की है। उन्होंने अपने आय का स्रोत खेती को बना लिया है इस तरह से वह आए प्राप्त करने के साथ-साथ घर में भी पूरी तरह से जिम्मेदारियों को निभातीे हैं यदि देखा जाए तो वह पुरुषों के मुकाबले अधिक कार्य कर रही हैं  इस बात को देखते हुए पुरुषों को अपनी सोच में तब्दीली लानी ही पड़ेगी और इस कार्य को करने में पूरी तरह से सरकार सहयोग कर रही है।     महिलाओं ने उत्पादन के क्षेत्र में पुरुषो...
IAS और PCS की करें फ्री में कोचिंग, इस संस्था द्बारा प्रतियोगियों को मिल रही है खास सुविधा।
Motivation

IAS और PCS की करें फ्री में कोचिंग, इस संस्था द्बारा प्रतियोगियों को मिल रही है खास सुविधा।

आईएएस और पीसीएस की तैयारी में लगे छात्रों के लिए सुनहरा मौका एक शहर ऐसा भी है जो कक्षाओं की निशुल्क ऑनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग करवाएगा और ये खास उन बच्चों के लिए जो आईएएस पीसीएस की कोचिंग धन न होने के कारण नहीं कर पा रहे हैं। साथ ही उन प्रतियोगियों को सहायता भी मिलेगी जो कोचिंग कभी दूर है तो कभी पास और कभी उनके पास कोचिंग की फीस नहीं है। इस कारण मायूसी से हार मान जाते हैं     IAS पीसीएस की तैयारी करने वाले प्रतियोगियों के लिए निशुल्क शिक्षा ऑनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग करवाने का निर्णय - कोचिंग की फीस नहीं है इस  कारण मायूसी से हार मान वालों के लिए  आईसीएस प्रयागराज ने IAS पीसीएस की तैयारी करने वाले प्रतियोगियों के लिए निशुल्क शिक्षा ऑनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग करवाने का निर्णय लिया है।  प्रयागराज में स्थित आईसीएस संस्था छात्रों के लिए पहले भी इस तरीके का कदम उठा चुकी है।  जिससे वह...
जनता की सेवा करने का निकाला नया तरीका – 43 एकड़ जमीन के फार्म हाउस का महेंद्र सिंह धोनी कर रहे हैं ऐसे प्रयोग,जानिए उत्पादन का तरीका।
Motivation

जनता की सेवा करने का निकाला नया तरीका – 43 एकड़ जमीन के फार्म हाउस का महेंद्र सिंह धोनी कर रहे हैं ऐसे प्रयोग,जानिए उत्पादन का तरीका।

आज हम आपको एक ऐसे शख्स के बारे में जानकारी देना चाहते हैं जो खिलाड़ी होने के साथ साथ देशभक्त भी है। जी हां इन्होने सर्वप्रथम देश के लिए क्रिकेट खेला और ना जाने कितनी बार अपने हेलीकॉप्टर शॉट से हारी हुई बाजी जितवाई , चूंकि सैनिको से लगाव रहा इसलिए इस क्रिकेटर को लोगों ने सीमा पर कई बार खड़े देखा, परंतु वर्तमान समय में ये (क्रिकेटर )अपने फॉर्म हाउस पर सब्जियां उगा रहे हैं। जी हां इस कार्य का भी मक़सद इनका देश सेवा ही है   मशहूर क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी - आप सोच रहे होंगे यह तो क्रिकेटर का नाम है। जी हां हम बात कर रहे हैं। देश के मशहूर क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी की यह झारखंड के रांची के रहने वाले हैं महेंद्र सिंह धोनी को आपने हमेशा टीवी पर ही देखा होगा। आपने कभी बल्ले से चौके छक्के उड़ाते हुए देखा होगा तो कभी बॉलिंग करते हुए लेकिन महेंद्र सिंह धोनी को आपने एक किसान के रू...
आटे की चक्की चलाने वाले का बेटा बना साइंटिस्ट
Motivation

आटे की चक्की चलाने वाले का बेटा बना साइंटिस्ट

मेहनत और सफलता एक ऐसी कड़ी है जो एक दूसरे के बगैर अधूरी है और इन दोनों के मिलने पर व्यक्ति की जिंदगी परिपूर्ण हो जाती है। जी हां यदि आप मेहनत कर रहे हैं तो यह हो सकता है की देरी से सफलता मिले परंतु मिलती जरूर है। हम बता रहें हैं हरियाणा के अशोक कुमार के बारे में हरियाणा के हिसार जनपद के रहने वाले अशोक की नियुक्त भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर में हो गई और यह मेहनत का ही फल था जो मिला।     आटे की चक्की से भरता है परिवार का पेट - अशोक मुकलान गांव के रहने वाले हैं और इनके पिता आटे की चक्की चलाते हैं। परिवार का पेट भरने का यही जरिया है इन आर्थिक परेशानियों के होते हुए भी अशोक संघर्ष करने में कामियाब रहे और सफलता पाई। अशोक ने मार्च माह में भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर रिक्रूटमेंट की परीक्षा दी थी परीक्षा के पश्चात दिसंबर में उनका इंटरव्यू हुआ। वह बेहद बेसब्री से रिजल्ट का इन्तेज...
पिता के साथ उठाया गोबर, टीन के डिब्बे को मेज बनाकर की ज्यूडिशियल एग्जा़म की तैयारी युवाओं के लिए प्रेरणा बनी सोनल।
Motivation

पिता के साथ उठाया गोबर, टीन के डिब्बे को मेज बनाकर की ज्यूडिशियल एग्जा़म की तैयारी युवाओं के लिए प्रेरणा बनी सोनल।

एक पिता कड़ी मेहनत कर बच्चों का पेट भरता है बदले में बच्चों से वह सफलता के शिखर पर वह पहुंचे इसके अलावा कुछ भी नहीं चाहता, और यदि ये सपना उसका बच्चे साकार कर दें तो पिता की आखों में आँसू के साथ मुस्कान दोनों ही खुशी से आ जाती हैं। अपने बच्चे के सफल होने पर एक पिता अपनी पूरी ज़िन्दगी की कठिनाई का फल पाया महसूस करता है जी हां, इस कहानी में भी कुछ ऐसा ही हुआ। राजस्थान की रहने वाली सोनल ने पिता का संंघर्ष देख सफलता पाने की ठानी और आखिरकार सफलता हाथ लगी।     सोनल की जिंदगी - सोनल राजस्थान के उदयपुर की इनके पिता खलील शर्मा और मांँ जसबीर आपके पिता डेरी चला कर परिवार का पेट भर रहें हैं और यह 26 वर्षीय सोनल भी अपने पिता के साथ काम में हाथ बटाती, सोनल गौशाला की सफाई का ध्यान रखतीे थी और वहीं पढ़ाई भी किया करती थी। इन्होंने अपनी मेहनत से बीए एलएलबी किया इसके बाद एलएलएम का एग...
बच्चों का पेट भरने के लिए लॉ ग्रेजुएट योगिता ने चुना ट्रक ड्राइवर का कार्य, और बनी देश की पहली ट्रक ड्राइवर ।
Motivation

बच्चों का पेट भरने के लिए लॉ ग्रेजुएट योगिता ने चुना ट्रक ड्राइवर का कार्य, और बनी देश की पहली ट्रक ड्राइवर ।

साहस है तो जीत है भोपाल में रहने वाली योग्यता की जिंदगी में उतार-चढ़ाव तो आए लेकिन योगिता ने हार ना मानी पढ़ने लिखने के बाद योगिता ने एक ऐसा कार्य चुना जो की पुरुषों के नाम से हमारे समाज में माना जाता है। "जिंदगी ने जब दी शिकस्त तो योग्यता ने दिखाई स्त्री शक्ति"( कुलसूम फात्मा ) यहां हम तसकिरा कर रहे हैं। भोपाल में रहने वाली एक मां का जिनकी जिंदगी में उतार-चढ़ाव आए और दुखों का भी पहाड़ टूटा वर्ष 2003 में योग्यता के पति राजबहादुर की एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई। अभी यह दुख दूर ना होने पाया था भाई की भी मृत्यु हो गई। इन सभी मुश्किलों का सामना करते हुए योगिता को बच्चों का पेट भरने के लिए आमदनी का ज़रिया ध्यान में बात आई तो उन्होंने  ट्रक ड्राइविंग को चुना।     योग्यता ने कॉमर्स और  law से डिग्री की हासिल - और ऐसा नहीं है की योगिता अनपढ़ है नहीं बल्कि 49 ...
IAS रमेश घोलप के जीवन का संघर्ष साइकिल की मरम्मत, लकवा और माँ का चूड़ियाँ बेचना
Motivation

IAS रमेश घोलप के जीवन का संघर्ष साइकिल की मरम्मत, लकवा और माँ का चूड़ियाँ बेचना

आज हम बात करने जा रहे हैं रमेश घोलप की जिन्होंने परेशानियों से हार ना मान कर संघर्ष किया और फिर सफलता पा ही ली। उन्होंने संघर्ष कर अपने नाम के आगे आखिरकार आईएस लगा ही लिया। सही ही कहा है -नज़रे झुकाए क्यों बैठे हो क़दम बढा़ओ तो जरा, तरक्की तुम्हारा संघर्ष के बाद इंतजार कर रही है।(कुलसूम फात्मा) माँ ने बेची चूड़ियां तो कभी एक पैर हुआ लकवा ग्रस्त फिर भी ना मानी हार कुछ ऐसा ही रमेश घोलप के साथ हुआ। जब उन्होंने नजरें उठाकर देखा और कदम बढ़ाया तो संघर्ष के बाद उन्हें सक्सेस मिली।     आइए जानते हैं किस तरह गुजरा रमेश घोलप का बचपन। बता दे बरसी महागांव जिला सोलापुर महाराष्ट्र के रहने वाले रमेश का बचपन बहुत ही दिक्कतों के साथ गुजरा। इनके पिता गोरख घोलप साइकिल की दुकान चलाते थे पिता साइकिल की मरम्मत कर परिवार का पेट भरते परंतु उन्हें शराब की लत थी जिसके कारण उन्हें हॉ...
4 साल की उम्र में माता-पिता ने छोड़ा, पैर से बनाई अद्भुत पेंटिंग राष्ट्रपति ने किया सम्मानित
Motivation

4 साल की उम्र में माता-पिता ने छोड़ा, पैर से बनाई अद्भुत पेंटिंग राष्ट्रपति ने किया सम्मानित

दोस्तों हम आपको ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं जिसमें कमी होते हुए भी अपनी तकदीर को भगवान पे विश्वास... और मेहनत के साथ बदल कर रख दिया। ये वह शक्स है जिसके पास मां बाप का प्यार तक ना था, लेकिन जिंदगी की मार के बाद भी इसने हार ना मानी और कड़ी मेहनत के साथ दुनिया में आखिरकार रंग बिखेर ही दिए ।     कमी होने से माता-पिता ने छोड़ा 4 साल के बच्चे को अस्पताल में। जी हां, आज हम आपको सुनील कुमार के बारे में बताने जा रहे हैं। इनके माता-पिता ने 4 साल की उम्र में अकेला अस्पताल में छोड़ दिया , ये बचपन में हरियाणा में रहा करते थे जब वह छोटे तकरीबन 4 साल के थे। तब बिजली की चपेट में आ गए जिसमें सुनील कुमार के दोनों हाथ चले गए , इनको हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया, लेकिन हाथ वापस ना आ सके। छोटे बच्चे को इस हालत में उनके माता-पिता ने अस्पताल में ही छोड़ दिया हालाकि बिना हाथ के इस ...
सफलता पाने की ललक में धोए घरों के बर्तन और सोईं भूखी पेट ,ऑटो ड्राइवर की बिटिया क्या बन सकती है मिस इंडिया की रनरअप, जाने मान्या की कहानी उनकी जु़बानी ।
Motivation

सफलता पाने की ललक में धोए घरों के बर्तन और सोईं भूखी पेट ,ऑटो ड्राइवर की बिटिया क्या बन सकती है मिस इंडिया की रनरअप, जाने मान्या की कहानी उनकी जु़बानी ।

"सफलता संघर्ष करने वाले मनुष्य के कदम चूमती है,वो फिर किसी शाही परिवार में जन्मी बेटी के कदम हो या फिर ऑटो रिक्शा चालक बेटी के"( कुलसूम फात्मा )   एक ऑटो रिक्शा चालक की बेटी मान्या की कहानी सुन आँखे आसू नही रोक पाती, सफलता ने जब चूमे कदम तो हर एक की जुबां पर बस इनका ही नाम हैं, जी हां हम बात कर रहे हैं मान्या सिंह की, जिन्होंने वीएलसीसी फेमिना मिस इंडिया 2020 की विनर्स आफ का खिताब अपने नाम कर लिया 2020 की रनर अप का ताज अपने नाम करने वाली मान्या सिंह के पिताजी का नाम ओमप्रकाश सिंह है मान्या जो  एक गरीब परिवार में जन्मी थी, परंतु इनमें कुछ कर दिखाने का जुनून भरपूर था। इन्होंने सोच लिया था की वह भले ही एक गरीब परिवार में पैदा हुई हैं, परंतु उनका भाग्य इसके बदले में उनको कुछ और ही दिखाएगा। इसलिए वह प्रयत्न करती रहीं और वह प्रयत्न आखिरकार काम आया 2020 की रनरअप का ताज अपने नाम करने वाली मान्या स...