Saturday, April 17

भारत में ऐसे वाहनो का नया जाँच अनिवार्य नहीं तो हो जाएगा कबाड़, सरकार की नयी पॉलिसी लॉंच

भारत के सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने आज लोकसभा में एक नई पॉलिसी का ऐलान किया जिसके तहत पुरानी गाड़ियों की फिटनेस से संबंधित पॉलिसियों को ध्यान में रखते हुए स्क्रेपिंग की व्यवस्था है सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। इस नई पॉलिसी के तहत अनफिट वाहनों को रद्द कर दिया जाएगा, 15 साल से पुराने सभी कमर्शियल गाड़ियां एवं 20 साल से पुराने सभी निजी गाड़ियों को फिटनेस टेस्ट से गुजरना होगा इसके बाद इन वाहनों का फिटनेस सर्टिफिकेट रिन्यू किया जाएगा। फिटनेस टेस्ट में फेल वाहनों का रजिस्ट्रेशन तुरंत रद्द किया जाएगा एवं उस वाहन को स्क्रैप किया जाएगा।

 

 

इस नई पॉलिसी से पुरानी गाड़ियों से निकले कबाड़ को रिसाइकल करके वाहन उद्योग इसका उपयोग कर सकते हैं जिससे वाहनों के निर्माण कि खर्च में कुछ कमी आएगी इसके अलावा इस पॉलिसी के लागू होने से 10 हजार करोड़ के नए निवेश के साथ-साथ 35000 नए रोजगार सृजित होंगे। भारत के गुजरात में स्क्रेपिंग के लिए विशेष केंद्र तैयार किए जाएंगे जहां स्क्रेपिंग की विभिन्न तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल किया जाएगा।

 

 

 

आइए जानते हैं इस पॉलिसी से जुड़े अहम जानकारी, हर हर पुराने निजी वाहन या कमर्शियल वाहन फिटनेस जांच में फिट नहीं पाए जाते हैं तो उनका रजिस्ट्रेशन तुरंत रद्द कर दिया जाएगा। सभी पुराने वाहनों का रजिस्ट्रेशन रिन्यू करने के लिए रजिस्ट्रेशन फी के रूप में पहले से अधिक राशि चुकानी होगी। इस गाइडलाइन में सभी राज्यों के सरकार या फिर केंद्र सरकार या फिर अन्य विभागों में चल रहे वाहन जो 15 साल से अधिक हैं ऐसे वाहनों का रजिस्ट्रेशन रेन्यू नहीं किया जाएगा बल्कि उन्हें स्क्रैप कर दिया जाएगा।

 

 

 

पुराने वाहनों को स्क्रैप करने के बाद उसकी कीमत कुछ इस तरह से लगाई जाएगी स्क्रैप किए गए वाहन की एक्स शोरूम कीमत जितनी होगी उसका चार से 6% राशि वाहन मालिक को दी जाएगी। गाड़ी को एस्क्रैप करने के बाद वाहन मालिक को स्क्रेपिंग सर्टिफिकेट दी जाएगी यह सर्टिफिकेट दिखाने पर नए वाहन के रजिस्ट्रेशन फीस में 100% की छूट दी जा सकती है।

 

 

 

यह फैसला 2022 के अप्रैल महीने से लागू होगी जिसमें 15 साल से पुरानी सभी गाड़ियों की स्क्रेपिंग शुरू की जाएगी एवं इनका फिटनेस जांच भी अनिवार्य हो जाएगा। अब तक मिले आंकड़ों के अनुसार 17 लाख मीडियम और हेवी कमर्शियल वाहन है जो अवैध फिटनेस सर्टिफिकेट से चलाए जा रहे हैं तथा जिनकी उम्र 15 साल से अधिक है, 51लाख ऐसे वाहन हैं जिनकी उम्र 20 साल से अधिक दर्ज की गई है। 34 लाख ऐसे वहां में जो 15 साल से अधिक पुराने हैं फिर भी सड़कों पर इनका इस्तेमाल किया जा रहा है। इस पॉलिसी के पास होने से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि ऐसे वाहनों के स्क्रेप होने से दुर्घटना की आंकड़ों में गिरावट देखने को मिलेगी।

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