Thursday, May 6

पिता के साथ उठाया गोबर, टीन के डिब्बे को मेज बनाकर की ज्यूडिशियल एग्जा़म की तैयारी युवाओं के लिए प्रेरणा बनी सोनल।

एक पिता कड़ी मेहनत कर बच्चों का पेट भरता है बदले में बच्चों से वह सफलता के शिखर पर वह पहुंचे इसके अलावा कुछ भी नहीं चाहता, और यदि ये सपना उसका बच्चे साकार कर दें तो पिता की आखों में आँसू के साथ मुस्कान दोनों ही खुशी से आ जाती हैं। अपने बच्चे के सफल होने पर एक पिता अपनी पूरी ज़िन्दगी की कठिनाई का फल पाया महसूस करता है जी हां, इस कहानी में भी कुछ ऐसा ही हुआ। राजस्थान की रहने वाली सोनल ने पिता का संंघर्ष देख सफलता पाने की ठानी और आखिरकार सफलता हाथ लगी।

 

 

सोनल की जिंदगी –

सोनल राजस्थान के उदयपुर की इनके पिता खलील शर्मा और मांँ जसबीर आपके पिता डेरी चला कर परिवार का पेट भर रहें हैं और यह 26 वर्षीय सोनल भी अपने पिता के साथ काम में हाथ बटाती, सोनल गौशाला की सफाई का ध्यान रखतीे थी और वहीं पढ़ाई भी किया करती थी। इन्होंने अपनी मेहनत से बीए एलएलबी किया इसके बाद एलएलएम का एग्जाम दिया, जिसमें फर्स्ट डिवीजन आयी उसके बाद सोनल वर्ष 2018 के राजस्थान न्यायिक सेवा के प्रतियोगी परीक्षा में भी सम्मिलित हुई, सोनल ने मजिस्ट्रेट की पढ़ाई बिना किसी कोचिंग के गौशाला में ही काम करते हुए की और आखिरकार आखिरी पड़ाव तक पहुंच ही गयी इनकी मेहनत का फल मजिस्ट्रेट की कुर्सी के रूप में मिला वर्तमान समय में सोनल से सभी युवा सीख ले सकते है जो समझते हैं सफलता के लिए बड़ी-बड़ी कोचिंग और आलीशान महल की जरूरत होती है।

 

 

 

सोनल ने 10 वर्ष की उम्र से की थी पिता की सहायता

 

बताते हैं सोनल केवल 2 साल की थी। जब से वह गौशाला में पिता के साथ काम में हाथ बटाती आप हर रोज सुबह 4:00 बजे उठती और गौशाला की साफ सफाई करती उसके बाद पिता के साथ दूध बेचने भी जाती यही नहीं बल्कि वह गौशाला में ही पढ़ाई पर भी ध्यान देती और वक्त से स्कूल कॉलेज भी जाती। और अपनी पढ़ाई के लिए लाइब्रेरी जाती और वहां जाकर नोट्स बनाती चूंकि आर्थिक स्थिति कमजोर थी। इस वजह से सोनल कभी कोचिंग नहीं गईं और ऐसे ही मेहनत कर सफलता हासिल की। क्योंकि सोनल इस नौकरी को पुरस्कृत नौकरी समझती थी। इसलिए शुरुआत से ही इनका सपना न्यायाधीश बनने का था और उन्होंने बताया मैंने गरीबी का सामना किया और मुझे पूरी आशा थी मैं ईमानदारी के साथ अपने कार्यों को करूंगी और सबको न्याय दूंगी। उन्होंने कहा मैं पहले शर्म महसूस करती थी की मेरे पिता एक दूधवाले हैं, लेकिन अब उन्हें इसी बात का पर फक्र होता है।

 

 

सोनल के सफलता का राज़ और बताया कैसे करें पढ़ाई।

 

उन्होंने कहा मैं गौशाला में कार्य करने के बाद गायों के बाड़े में पढाई के लिए खाली पीपों को टेबल बना लिया करती थी। और मैं हर रोज़ यह पढ़ाई 10 से 12 घंटे करती थी पढाई के दौरान मेरा फोकस केवल अपने लक्ष्य पर ही रहता था और किसी सोशल साइट से में कभी नहीं जुड़ी और ना कोशिश की , सोनल बताती हैं की मैंने परिश्रम के साथ-साथ 12वीं कक्षा में भी मैथ सब्जेक्ट में टॉप किया था और हिंदी सब्जेक्ट में पूरे इंडिया को टॉप किया था अपनी ग्रेजुएशन की शिक्षा एलएलबी तथा की परीक्षाओं में भी मैंने टॉप किया। एक दीक्षांत समारोह में दो गोल्ड मेडल तथा चांसलर मेडल से सम्मानित किया गया था।

 

 

मेहनत का श्रेय दिया केवल अपने पिता को

सोनल ने कहा मेरी मेहनत का श्रेय और मेरी सफलता का श्रेय केवल मैं अपने पिता को ही देना चाहूंगी क्योंकि मैं अपने पिता को सुबह के समय 4:00 बजे उठता देखती जो पूरा दिन काम करते और आधी रात में ही सोते थे इनकी पिता ने इनकी पढ़ाई के लिए बहुत मेहनत की यहां तक के कर्ज भी लिया था अपने पिता को सुकून के साथ जिंदगी बिताते देखना चाहती हैं पिता की मेहनत को समझते हुए सोनल ने अपने सपनों को साकार किया और अपने पिता को खुशी दी।

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