Sunday, May 16

IES श्रुति शर्मा ने बताया पिता की बीमारी से जूझते हुए 15 दिन में पास किया था ऐसे यूपीएससी एग्जाम ।

The struggle of UPSC Shruti Sharma -श्रुति शर्मा एक आईईएस ऑफिसर जो रक्षा मंत्रालय में इस समय कार्यरत हैं। श्रुति शर्मा बताती हैं की मेरे परिवार में लड़कियों ने कभी जॉब नहीं की थी और स्कूल में पास हो जाना ही बड़ी बात थी। श्रुति शर्मा कहती हैं बीटेक में जब कॉलेज लाइफ शुरू होती है तो सभी स्टूडेंट्स भटक जाते हैं और मेरे साथ भी वही हुआ। स्टार्टिंग में मैंने पढ़ाई को हल्के में लिया और मेरी बैक आई लगातार मेरी 5 बैक आई और मैंने पांचो बैक क्लियर की। और फिर 2013 में मेरे पापा को लिवर सिरोसिस डिटेक्ट हुआ उनकी तबीयत बिगड़ने लगी, और तब मुझे यह एहसास हुआ कि मुझे कुछ करना है वह कहती हैं अपने भाई बहनों में सबसे बड़ी हूं और बड़े होने के नाते मैं रिस्पांसिबल रही हूं।

 

 

 

पिता की हालत खराब थी, परंतु दिया एग्जाम।

टाइम के साथ पापा की तबियत में कॉम्प्लिकेशंस बढ़ती भी गई और इधर मेरा गेट का एग्जा़म था 2014 में जिस दिन मेरा गेट का एग्जाम था उसी के पहले दिन मेंरे पापा की ये हालत थी के वो किसी को पहचान तक नहीं पा रहे थे और वह हॉस्पिटल में थे और उसी दिन मेरा गेट का एग्जाम था। उस दिन मुझे मतलब क्या करना है। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं कैसे अपने इमोशंस को साइड में रखते हुए अपना एग्जा़म दूंगी और मैने एग्जा़म दिया उस समय मेरी गेट में हजार रैंक आई क्योंकि मैं ,कोचिंग या सीरियसली पढाई नहीं कर पाई थी घर में इतना टेन्शन का माहौल था तो मुझे पता नहीं था 1,000 रैंक के साथ किधर जाना चाहिए। और मैने सोचा मैं अगले साल एग्जाम फिर से निकालती हूं। उस टाइम पर पापा की कंडीशन और खराब होती गई वह जो 1 साल का दौर था। 2014 से 15 का दौर उस टाइम पर मुझे दोनों चीजों से जूझना था। 2015 में मैंने गेट का एग्जाम काफी अच्छी रैंक से निकाला और 2014 में मैंने दोस्तों के कहने पर ऐसे ही यूपीएससी एग्जाम दे दिया था, जिसमें मेरा 2 रैंक से रह गया था तो मुझे लगा मैं अच्छे से तैयारी करके अगर एग्जा़म दूँ तो मेरा यह क्रैक हो जाएगा 2015 में मैंने फिर से एग्जाम दिया और मेरा 7 मार्क से रह गया और उसी साल मेरे पिता की मृत्यु भी हो गई। पिता की मृत्यु के बाद में डिप्रेशन में चली गई। मैं यह सोचने क़ाबिल ही ना थी के मैं IES बन भी सकती हूं।

 

15 दिन में केवल  2-2 घंटे की ली नींद और दिया एग्जाम।

2016 में मैंने फिर दोस्तों के कहने पर यूपीएससी एग्जाम का फॉर्म भर दिया। उस टाइम मेरे पास 15 दिन का ही समय था एमटेक के एग्जाम खत्म होने और यूपीएससी के एग्जाम शुरू होने में और मैंने उन 15 दिन में अपनी जान लगा दी। हालांकि आईईएस का सिलेबस 15 दिन का नहीं होता है। लेकिन मैंने यह सोच लिया था मुझे पीछे नहीं हटना है और मैंने दो 2 घंटे की नींद लेकर पूरा संघर्ष कर एग्जाम दिया और फिर वह दिन आया कि मैंने यह एग्जाम क्रैक कर लिया था

श्रुति शर्मा कहती हैं यदि आप में संघर्ष करने की हिम्मत है और कुछ पाने का जुनून है तो आपको कोई हरा नहीं सकता है। आप उस मंजिल को अंत में पा कर ही रहेंगे।

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