Thursday, May 6

4 साल की उम्र में माता-पिता ने छोड़ा, पैर से बनाई अद्भुत पेंटिंग राष्ट्रपति ने किया सम्मानित

दोस्तों हम आपको ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं जिसमें कमी होते हुए भी अपनी तकदीर को भगवान पे विश्वास… और मेहनत के साथ बदल कर रख दिया। ये वह शक्स है जिसके पास मां बाप का प्यार तक ना था, लेकिन जिंदगी की मार के बाद भी इसने हार ना मानी और कड़ी मेहनत के साथ दुनिया में आखिरकार रंग बिखेर ही दिए ।

 

 

कमी होने से माता-पिता ने छोड़ा 4 साल के बच्चे को अस्पताल में।

जी हां, आज हम आपको सुनील कुमार के बारे में बताने जा रहे हैं। इनके माता-पिता ने 4 साल की उम्र में अकेला अस्पताल में छोड़ दिया , ये बचपन में हरियाणा में रहा करते थे जब वह छोटे तकरीबन 4 साल के थे। तब बिजली की चपेट में आ गए जिसमें सुनील कुमार के दोनों हाथ चले गए , इनको हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया, लेकिन हाथ वापस ना आ सके। छोटे बच्चे को इस हालत में उनके माता-पिता ने अस्पताल में ही छोड़ दिया हालाकि बिना हाथ के इस बच्चे को उस समय देख रेख के साथ बेहद प्यार की जरूरत थी सुनील का जीवन आने वाली परेशानियों और संघर्ष से भरा हुआ था।

 

 

दयालु महिला ने बदली किस्मत-

आपने सुना ही होगा जिसका कोई नहीं होता, उसका खुदा होता है। माता पिता के छोड़ने के बाद सुनील को एक दयालु महिला रहम खा कर मदर टेरेसा हरियाणा साकेत काउंसिल परिषद नामक एक आश्रम  में ले आई। जहां पर उसके ही तरह के दिव्यांग बच्चों को अपनी ताकत पर जीवन जीना सिखाया जा रहा था। वह उन्हें अपने सारे काम अपने पैरों से ही करना सिखाते थे। और सुनील ने भी यह हुनर सीखा। कुछ समय बाद सुनील ने भी अपने पैरों से पेंटिंग ब्रश पकड़ना सीख लिया था, कुछ समय बाद सुनील ने एक ऐसी अद्भुत और खूबसूरत पेंटिंग बनाई के लोग हैरान रह गए।

 

 

अपने पैरों की उंगलियों से पेन पकड़ने का सीखा हुनर-

सुनील कुमार ने अपनी तकदीर को अपने परिश्रम से बदल दिया था। लोगों को जिंदगी जीने की कला सिखाई जो अपनी दिक्कतों से हारकर गलत निर्णय ले लेते हैं या फिर गलत निर्णय लेने के बारे में सोचते हैं। सुनील ने उन्हें बता दिया कडी़ मेहनत से तक़दीर बदली जा सकती है आश्रम में रहते हुए सुनील कुमार को पढ़ना लिखना भी सिखाया गया, और अपनी ताकत के बलबूते पर सारे काम करने की सलाहियत पैदा की गई। उन्होंने अपने शिक्षकों की मदद से अपने पैरों की उंगलियों से ही पेन और पेंसिल पकड़ना सीखा इसके साथ ही कंप्यूटर भी  सीखा,उन्होंने कंप्यूटर शिक्षा में डिप्लोमा किया और पेंटिंग बनाने का हुनर सीखा पेंटिंग बनाने में सुनील की अधिक रुचि थी। इसलिए वह एक चित्रकार बन गए।

 

 

पेंटिंग के साथ भरे अपनी जिंदगी में भी रंग।

लगातार कड़ी मेहनत के साथ सुनील कुमार ने एक खास थीम सेवा पांडा पर खूबसूरत पेंटिंग  बनाई जिसके लिए उनको उस वक्त की राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल जी ने पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया। इसके बाद सुनील कुमार ने इसी क्षेत्र में अपना करियर बनाने के लिए ठान लिया था। वर्तमान समय में सुनील कुमार के पैरों से बनाई गई पेंटिंग काफी ज्यादा दामों में बिकती है जिन्हें बड़े-बड़े लोग भी खरीदते हैं। उनकी पेंटिंग्स फाइव स्टार होटलों और कई रईस लोगों के घरों में देखने को मिल रही है। अपनी ताकत और हौसले से सुनील कुमार ने केवल अपने चित्रों में रंग ही नहीं भरे बल्कि अपनी जिंदगी को भी एक सुनहरा मौका दिया, उन्होंने सारी दुनिया को यह सिखा दिया इंसान अपनी किस्मत से नहीं बल्कि अपनी कड़ी मेहनत से पहचाना जाता है।

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